अहमद मुतवस्सेलियान, ईरान पर सद्दाम शासन की ओर से थोपी गई आठ साल की जंग में मोहम्मद रसूलुल्लाह सत्ताईसवीं डिवीजन के कमांडर थे जो 4 जुलाई सन 1982 को लेबनान के त्राबलस से बैरूत जाते हुए रास्ते में ज़ायोनी शासन की साज़िश के तहत लेबनान की फ़्लान्जिस्ट पार्टी के छापामारों के हाथों अग़वा कर लिए गए थे।
परहेज़गार आलिमे दीन
आयतुल्लाह अलहाज सैयद जवाद ख़ामनेई आज़रबाईजान प्रांत के बहुत परहेज़गार व सादा जीवन गुज़ारने वाले आलिमे दीन थे। नजफ़े अशरफ़ में बरसों तालीम हासिल करने के बाद वह मशहद रवाना हुए और वहीं के होकर रह गए। इस मशहूर परहेज़गार आलिमे दीन के निधन के वक़्त मशहद में काफ़ी तादाद में श्रद्धालु मौजूद थे लेकिन 91 साल की उम्र और पचास साल तक इस्लामी ज्ञान की शिक्षा देने और तबलीग़ की सरगर्मियों तथा पेश नमाज़ के रूप में सेवा करने के बाद उनकी कुल संपत्ति मशहद में गरीबों के मुहल्ले में एक मामूली सा मकान और पैंतालीस हज़ार तूमान था।
अमरीकी हुकूमत पहले दिन से इस इंक़ेलाब के साथ तल्ख़ी और बदसुलूकी से पेश आई। फ़ार्स खाड़ी में अमरीकी अफ़सर ने जलपोत से फ़ायर किए गए मिसाइल से हमारे यात्री विमान को मार गिराया। तक़रीबन 300 यात्री मारे गए। इस घटना पर उस अफ़सर को सज़ा देने के बजाए अमरीकी राष्ट्रपति ने इनाम से नवाज़ा! हमारी क़ौम इन चीज़ों को कभी भूल सकती है?
इमाम ख़ामेनेई
21 मार्च 2009
यूरोप और अमरीका में ह्यूमन राइट्स के झूठे दावेदार जिन्होंने यूक्रेन के मसले में आसमान सर पर उठा लिया, फ़िलिस्तीन में होने वाले संगीन अपराधों पर ख़ामोश हैं। मज़लूम का बचाव नहीं करते बल्कि ख़ूंख़ार भेड़िए का साथ दे रहे हैं।
इमाम ख़ामेनेई
29 अप्रैल 2022
बेहतरीन ख़ानदान वाले, ख़ूबरू, ताक़तवर और दिलनशीं व्यक्तित्व के हज़ारों नौजवान हज़रत अली अलैहिस्सलाम के पांव की धूल के बराबर भी नहीं हैं। हज़ारों आला ख़ानदान की ख़ूबसूरत लड़कियां हज़रत फ़ातेमा ज़हरा के क़दमों की धूल के बराबर भी नहीं हैं। हज़रत फ़ातेमा ज़हरा पैग़म्बरे इस्लाम की बेटी थीं जो इस्लामी दुनिया के सरदार और हाकिम थे। हज़रत अली भी इस्लाम के सबसे बड़े सिपहसालार थे। अब ज़रा देखिए कि उनकी शादी किस अंदाज़ से हुई? मेहर क्या था? दहेज क्या था? हर काम अल्लाह का नाम लेकर और उसके ज़िक्र के साथ। यह हमारे लिए आदर्श है।
इमाम ख़ामेनेई
6 मई 1996
हज़रत फ़ातेमा ज़हरा, इस्लामी ख़ातून की बुलंद तरीन सतह पर पहुंचने वाली महिला हैं। इस सतह पर पहुंचने के साथ ही वह माँ की ज़िम्मेदारी को पूरा करती हैं, बीवी के किरदार को अदा करती हैं, घरेलू काम करती हैं। इन चीज़ों को समझने की ज़रूरत है।
दुश्मनों ने इन चार दशकों में हमारी कमज़ोरियों और ख़ामियों से बड़ी उम्मीद लगा रखी थी लेकिन उन्हें बार बार मायूसी हाथ लगी। उनकी मुश्किल यह रही कि इस मायूसी की बुनियादी वजह उनकी समझ में नहीं आई। दुश्मन समझ ही न सके कि दुनिया में राजनैतिक समीकरणों और संबंधों के अलावा कुछ दूसरे समीकरण और संबंध भी मौजूद हैं और वो अल्लाह के क़ानून हैं।
इमाम ख़ामेनेई
28 जून 2022
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई से न्यायपालिका के प्रमुख और अधिकारियों ने तेहरान में मुलाक़ात की। इस मुलाक़ात में आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने समाजों में अल्लाह की अटल परंपराओं की ओर इशारा करते हुए कहाः सन 1981 की बड़ी कटु घटनाओं के मुक़ाबले में ईरानी राष्ट्र और इस्लामी गणराज्य व्यवस्था की हैरतनाक कामयाबी की वजह दुश्मन से न डरना, उसके मुक़ाबले में डट जाना और सतत कोशिश थी।
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने ईरान में मनाए जाने वाले न्यायपालिका सप्ताह के मौक़े पर 28 जून 2022 को न्यायपालिका के प्रमुख और ओहदेदारों से मुलाक़ात में इस विभाग की ज़िम्मेदारियों और अहमियत को बयान किया। आपने इस्लामी जुमहूरिया के ख़िलाफ़ दुश्मनों की साज़िशों और उनकी नाकामी के बारे में गुफ़तुगू की। इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने सुन्नते इलाही और क़ानूने क़ुदरत के बारे में मार्गदर्शक टिप्पणी की।
तक़रीर का अनुवाद पेश हैः
यह अरब व ग़ैर अरब हुकूमतें जिन्होंने ज़ायोनियों से हाथ मिलाया, उन्हें गले लगाया, उनके साथ मीटिंगें कीं, कुछ भी हासिल नहीं कर पाएंगी। नुक़सान के अलावा उन्हें कुछ मिलने वाला नहीं है। पहली चीज़ तो यह कि ख़ुद उनके अवाम ख़िलाफ़ हैं। इसके अलावा ज़ायोनी सरकार उनका ख़ून चूस रही है, उनका शोषण कर रही है। यह समझ नहीं रही हैं।
इमाम ख़ामेनेई
8 जून 2022
ज़ियारत क़ुबूल होने का मतलब यह है कि इमाम से मुलाक़ात का जो फ़ायदा, मुलाक़ात करने वाले को मिलता है, वह आपको हासिल हो। ज़ियारत क़ुबूल होने का मतलब यह है। इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने पासदाराने इंक़ेलाब फ़ोर्स आईआरजीसी से 23 अगस्त सन 2003 को हुई अपनी मुलाक़ात में इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम की ज़ियारत के आदाब या संस्कार बयान किए जो पेश किए जा रहे हैं।
दीन इत्तेहाद का सबब है, प्रगति का कारण है, त्याग और बलिदान की वजह है। दीन के जज़्बे ने क़बीलों को इस अंदाज़ से मैदानों में एक दूसरे के साथ ला खड़ा किया। जातीय फ़र्क़ वग़ैरा को जुदाई की वजह नहीं बनने दिया, मतभेद पैदा नहीं होने दिया
इमाम ख़ामेनेई
21 जून 2022
महान विद्वान, मुजाहिद और राजनेता शहीद डाक्टर मुसतफ़ा चमरान के शहादत दिवस 31 ख़ुरदाद बराबर 21 जून पर और इसी दिन मनाए जाने वाले स्वयंसेवी प्रोफ़ेसरों के राष्ट्रीय दिन के उपलक्ष्य में इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने प्रोफ़ेसरों और शिक्षकों के लिए एक संदेश जारी किया।