उन्होंने 18 फ़रवरी 1978 को तबरेज़ के अवाम के ऐतिहासिक आंदोलन की सालगिरह के उपलक्ष्य में आज 17 फ़रवरी 2026 की सुबह तेहरान के इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में आयोजित इस मुलाक़ात में कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति की धमकी भरी बातें, ईरानी राष्ट्र पर वर्चस्व जमाने की उनकी इच्छा को दर्शाती हैं।

उन्होंने इस बात पर बल देते हुए कि अमरीकी जंग की धमकी देने के बावजूद यह जानते हैं कि राजनैतिक, आर्थिक मुश्किलों और अपनी अंतर्राष्ट्रीय साख के मद्देनज़र, इसे व्यावहारिक नहीं कर सकते, कहाः वे जानते हैं कि अगर उन्होंने कोई ग़लती की तो क्या अंजाम भुगतेंगे।

उन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति की, दुनिया की सबसे ताक़तवर फ़ौज के स्वामी होने होने पर आधारित बार बार की धमकियों की ओर इशारा करते हुए बल दियाः दुनिया की सबसे ताक़तवर फ़ौज मुमकिन है कभी ऐसा तमांचा खाए कि अपनी जगह से उठ न सके।

उन्होंने अमरीकियों की धमकी और उनकी ओर से दूसरे क़दम उठाए जाने, जैसे ईरान की ओर एयरक्राफ़्ट कैरियर भेजे जाने के बारे में कहाः अलबत्ता युद्धपोत एक ख़तरनाक उपकरण है लेकिन उस से ज़्यादा ख़तरनाक वह हथियार है जो उसे समुद्र की गहराई में पहुंचा सकता है।

आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने अमरीकी राष्ट्रपति के ईरानी इंक़ेलाब के 47 साल गुज़रने के बावजूद, इस्लामी गणराज्य को ख़त्म न कर पाने पर आधारित एतेराफ़ की ओर इशारा करते हुए बल दियाः मैं कह रहा हूं: तुम भी इस्लामी गणराज्य को नहीं मिटा पाओगे, क्योंकि इस्लामी गणराज्य, अवाम से अलग सरकार नहीं है बल्कि एक ज़िंदा, डटी हुयी और मज़बूत क़ौम पर टिका हुआ है।

उन्होंने अमरीका की बहुत ज़्यादा आर्थिक, राजनैतिक और सामाजिक मुश्किलों को अमरीकी साम्राज्यवाद के पतन की निशानियों में गिनवाया और कहाः हमारे साथ अमरीका का मसला यह है कि वह ईरान को निगलना चाहता है लेकिन ईरानी क़ौम और इस्लामी गणराज्य उसे इस लक्ष्य को हासिल नहीं करने दे रहे हैं।

इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने अमरीका के भ्रष्ट और ज़ालिम साम्राज्य के पतन की दूसरी निशानियों में, उनके अतार्किक व्यवहार को बताया और कहाः उनके अतार्किक व्यवहार की मिसाल, ईरान के मसलों में उनका हस्तक्षेप है कि जिसमें, हमारा एक अहम मसला यानी हथियारों का मसला भी है।

उन्होंने इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) के उस ऐतिहासिक कथन की ओर इशारा करते हुए जिसमें उन्होंने कहा था कि "मुझ जैसा यज़ीद जैसे की बैअत नहीं करेगा।" कहाः ईरानी क़ौम भी कह रही है हमारे जैसी एक क़ौम ऐसी संस्कृति, ऐसे इतिहास वाली, ऐसी उच्च आध्यात्मिक शिक्षा वाली क़ौम ऐसे भ्रष्ट लोगों की जैसे अमरीका की सत्ता में मौजूदा हैं, बैअत नहीं करेगी।

इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने "बदनाम द्वीप" स्कैंडल में घिनौने भ्रष्टाचार के बेनक़ाब होने को, पश्चिम की सभ्यता और उसकी लिबरल डेमोक्रेसी की अस्लियत के सामने आने की निशानी बताया और कहाः इस द्वीप का मामला, पश्चिमी राजनेताओं के भ्रष्टाचार के बारे में अब तक जो भी हम लोगों ने सुना था, उस पर भारी है। अलबत्ता यह उनके ढेर सारे भ्रष्टाचारों का महज़ एक नमूना है और जिस तरह यह मसला छिपा हुआ था लेकिन बेनक़ाब हो गया, और भी बहुत से केस हैं जिन पर से बाद में पर्दा हटेगा।

इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने "क़ौम के डिटरेंस वाले हथियारों के मालिक होने" को ज़रूरी और वाजिब बताया और कहाः कोई भी मुल्क डिटरेंस वाले हथियारों के बिना, दुश्मन के पैरों तले कुचल जाएगा, लेकिन अमरीकी हथियारों के मसले में हस्तक्षेप करते हुए कहते हैं कि आप फ़ुलां प्रकार या अमुक मारक क्षमता वाले मिज़ाईल न रखें। हालांकि इस मसले का संबंध ईरानी क़ौम से है, इस से उनका कोई लेना देना नहीं है। 

उन्होंने मुल्क को चलाने, इलाज, खेती और ऊर्जा के मैदान में शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा उद्योग के स्वामी होने के ईरान के अधिकार में अमरीका के हस्तक्षेप को, उनके अतार्किक व्यवहार की एक और मिसाल बताया और अमरीकियो को संबोधित करते हुए कहाः इस मसले का संबंध ईरानी क़ौम से है। इस से तुम्हारा क्या संबंध है?

आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने यह बात याद दिलायी कि परमाणु प्रतिष्ठान और यूरेनियम एनरिचमंट के अधिकार का स्वामी होना, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए के चार्टर और समझौतों में है जिसे आधिकारिक तौर पर मान्यता दी गयी है और क़ौमों के अधिकारों में अमरीकियों का हस्तक्षेप, आज और अतीत के उनके अधिकारियों के दिमाग़ी असंतुलन को बताता है।

इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने अमरीकियों की और ज़्यादा हैरत अंगेज़ मूर्खता, वार्ता की तरफ़ उनकी ओर से दिए गए बुलावे को बताया और कहाः वे कहते हैं कि आइये परमाणु ऊर्जा के बारे में आपस में वार्ता करें, लेकिन वार्ता का नतीजा यह हो कि आप के पास परमाणु ऊर्जा न रहे!

आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने कहा कि अगर यह तय हो कि वार्ता होनी है, तो वार्ता से पहले उसके नतीजे को तय करना, एक ग़लत और मूर्खतापूर्ण काम है। उन्होंने कहाः यह मूर्खतापूर्ण काम अमरीकी राष्ट्रपति और सरकार और कुछ अमरीकी सिनेटर कर रहे हैं और नहीं सोच रहे हैं कि यह राह उन्हें बंद गली में ले जाएगी।

इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने जनवरी महीने के फ़ितने के स्वरूप की व्याख्या में कहाः अमरीका और ज़ायोनी शासन की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने कुछ दूसरे देशों की ख़ुफ़िया एजेंसियों की मदद से, काफ़ी पहले से कुछ दुष्ट और हिस्ट्री शीटर मुजरिमों को अपनी ओर आकर्षित कर विदेश में उन्हें पैसे, ट्रेनिंग और हथियार दिए और सैन्य तथा सरकारी केन्द्रों पर हमले और विध्वंस के लिए उन्हें देश के भीतर भेजा ताकि उचित मौक़े पर मैदान में आएं, यह मौक़ा उन्हें जनवरी के महीने में मिला।

उन्होंने कहाः ट्रेंड तत्वों ने कुछ अनाड़ी और नादान लोगों को आगे भेजा और ख़ुद तरह तरह के हथियारों और अंधाधुंध हिंसा की नीति के साथ मैदान में आए और दाइश की तरह हतप्रभ करने वाली हिंसा अपनाते हुए आगज़नी की, लोगों की हत्या की और विध्वंस किया।

आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने, इन करतूतों का लक्ष्य सिस्टम के स्तंभों को कमज़ोर करना बताया और कहाः अलबत्ता पुलिस, बसीज, आईआरजीसी फ़ोर्सेज़ और बड़ी तादाद में अवाम, दंगाइयों के मुक़ाबले में डट गए और तख़्तापलट की कोशिश अपनी सभी तैयारियों और विशाल ख़र्चे के बावजूद, पूरी तरह नाकाम हो गयी और ईरानी क़ौम मैदान सर कर लिया।  

उन्होंने दंगों में ज़मीन पर गिरने वाले ख़ून के बारे में कहाः कुछ फ़ितने के सरग़ना और तख़्तापलट करने वालों का भाग थे जो नरक में गए कि जिनका मामला अल्लाह के हाथ में है लेकिन मारे गए तीन तरह के वर्ग के लोगों को हम अपने बच्चे समझते हैं और उन सब के लिए हम शोकाकुल हैं।

इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने मरने वालों के पहले वर्ग यानी पुलिस, बसीज, आईआरजीसी और उनका साथ देने वालों को समाज और सिस्टम की सुरक्षा, अमन और सलामती की राह के ऐसे शहीद बताया जिनका दर्जा ज़्यादा बुलंद है और कहाः जान से हाथ धोने वाले दूसरे वर्ग के लोग वे बेगुनाह और रास्ता चलने वाले लोग थे, जो शहीद हैं। जान गवांने वाले तीसरे वर्ग के वे धोखा खाए हुए लोग हैं जिन्होंने नादानी की और फ़ितना करने वालों के साथ मिल गए।

आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने दाइश को बनाने में अमरीकियों के एतेराफ़ की ओर इशारा करते हुए कहाः वह दाइश तो काफ़ी हद तक मिट गया लेकिन ये "नया दाइश" है कि जिसके संबंध में अवाम और सभी अधिकारियों को होशियार रहना चाहिए।

उन्होंने अंत में 12 जनवरी और 11 फ़रवरी 2026 की रैलियों को अल्लाह की निशानियों में बताया और बल दियाः जो अज़ीज़ क़ौम इस तरह दुश्मन की साज़िशों और करतूतों पर विजयी हुयी, उसे चाहिए कि राष्ट्रीय एकता, होशियारी और तैयारी के साथ, अल्लाह की ओर से मिली इस तौफ़ीक़ की रक्षा करे।