बीसवीं सदी अमरीकी ख़्वाबों की दुनिया है, अमरीकियों का दावा था कि दुनिया उनकी उंगली पर नाचती है। इसी दावे के साथ ही 1991 में पूर्व सोवियत संघ के विघटन और दुनिया के एक ध्रुवीय हो जाने के बाद, भूतपूर्त अमरीकी राष्ट्रपति बुश सीनियर ने दुनिया में पुराना वर्ल्ड आर्डर ख़त्म होने की बात कही और बुद्धिजीवियों व राजनैतिक टीकाकारों ने भी अमरीकी चौधराहट और अमरीकी सदी के आग़ाज़ की भविष्यवाणी कर दी। सबने कहा कि अब दुनिया पर अमरीकी जीवन शैली और अमरीकी मूल्य छा जाएंगे।
पैग़म्बरे इस्लाम की व्यक्तिगत व सामाजिक सीरत (चरित्र) पर एक नज़र

बेहतरीन नमूना

पश्चिमी देशों की ओर से कहा जाता है कि ईरान वार्ता की मेज़ पर लौटे, क्या ईरान को वार्ता में दिलचस्पी नहीं है?

आयतुल्लाह ख़ामेनई ने 28 जुलाई 2021 की अपनी स्पीच में परमाणु वार्ता के बारे में महत्वपूर्ण बिंदु बयान किए।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने 8 जनवरी 2021 को टीवी पर अपने एक संबोधन में परमाणु समझौते (JCPOA) के बारे में ईरान के रवैये और इस सिलसिले में अमरीका की ज़िम्मेदारियों के बारे में कहाः “परमाणु समझौते में अमरीका की वापसी पर हमारा कोई आग्रह नहीं है, बुनियादी तौर पर यह हमारी यह समस्या ही नहीं है कि अमरीका JCPOA में वापस लौटे या न लौटे। हमारी जो तर्कसंगत मांग है, वह प्रतिबंधों की समाप्ति की है जो ईरानी राष्ट्र का छीना गया हक़ है।“ ये जुमले इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के संबोधन के अंत में कहे गए और उन्होंने इसे इस्लामी गणराज्य ईरान की अंतिम बात क़रार दिया।
8 फ़रवरी 2021 को रूस के राष्ट्रपति विलादिमीर पुतीन के नाम इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई का संदेश, ईरान के संसद सभापति मुहम्मद बाक़िर क़ालीबाफ़ के माध्यम से रूस के संसद सभापति और पुतीन के विशेष प्रतिनिधि के हवाले किया गया। KHAMENEI.IR ने इस बारे में वर्तमान विदेश मंत्री और अंतर्राष्ट्रीय मामलों में ईरानी स्पीकर के तत्कालीन विशेष प्रतिनिधि हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान से बातचीत का सारांश पेश कर रही है।
कोरोना वायरस की महामारी फैली तो दुनिया के कई देशों ने उसका टीका या वैकसीन बनाने के लिए रिसर्च का काम शुरू कर दिया। ईरान में भी मेडिकल साइंस के कई रिसर्च सेंटर्ज़ ने पश्चिम की कड़ी पाबंदियों के बावजूद स्वदेशी वैकसीन बनाने के लिए रिसर्च का काम शुरू कर दिया। इसके नतीजे में “कोविरान बरकत” के नाम से ईरानी वैकसीन बन चुकी है। KHAMENEI.IR ने फ़रमाने इमाम संस्था की एग्ज़ेक्यूटिव कमेटी की रिसर्च टीम के प्रमुख डॉक्टर हसन जलीली से इस संबंध में बात की है। पेश हैं इस इंटरव्यू के कुछ अहम अंश।