अमरीका दुनिया पर हावी ताक़त थी मगर आज नहीं है। इलाक़े में अमरीका शिकस्त खा चुका है। हर कोशिश के बावजूद, हर हथकंडा इस्तेमाल करने के बावजूद बड़ा शैतान इस इलाक़े में अपना मक़सद हासिल न कर सका। इस काम के चैम्पियन सुलैमानी थे।
इमाम ख़ामेनेई
इस्लामी इन्क़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने रविवार दोपहर को शहीद क़ासिम सुलैमानी के घरवालों और उनकी याद में प्रोग्राम आयोजित करने वाली कमेटी के मेंबर्स से मुलाक़ात की।
विश्व विख्यात कमांडर जनरल क़ासिम सुलैमानी की तीसरी बरसी के मौक़े पर शहीद के परिवार और बर्सी के कार्यक्रमों का आयोजन करने वाली कमेटी के सदस्यों ने इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई से मुलाक़ात की। 1 जनवरी 2023 को होने वाली इस मुलाक़ात में आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने शहीद सुलैमानी के व्यक्तित्व और उनकी ख़ुसूसियतों के बारे में बात की और कुछ अहम निर्देश दिए। (1)
स्पीच का हिंदी अनुवादः
इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में पैग़म्बर इस्लाम की बेटी हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (अ.स.) की शहादत की मुनासेबत से गुरुवार की रात भी मजलिस का आयोजन किया गया। ये इस सिलसिले की आख़री मजलिस थी।
तेहरान के इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में पैग़म्बर इस्लाम की बेटी हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स.अ.) की शहादत के दिन की मुनासेबत से मंगलवार की शाम एक मजलिस का आयोजन किया गया।
बहुत कम मुद्दत के अंदर पैग़म्बरे इस्लाम के दिल को हज़रत ख़दीजा और हज़रत अबू तालिब की वफ़ात से दो गहरे सदमे पहुंचे। पैग़म्बर को शिद्दत से तनहाई का एहसास हुआ। उन दिनों हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा सहारा बनीं और अपने नन्हें हाथों से पैग़म्बर के चेहरे पर पड़ी दुख और पीड़ा की गर्द हटाई। उम्मे अबीहा यानी अपने वालिद की मां, पैग़म्बर की ढारस बंधाने वाली। यह लक़ब उसी दौर का है।
इमाम ख़ामेनेई
24 नवम्बर 1994
पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम की बेटी हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की शहादत की मुनासेबत पर तेरहान के इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में सोमवार की रात मजलिस हुयी, जिसमें इस्लामी इन्क़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैय्यद अली ख़ामेनेई और सीमित तादाद में अवाम शरीक हुए।
रवायतों में नज़र आता है कि हज़रत ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के पास बस नबूवत व इमामत की ज़िम्मेदारी नहीं थी वरना रूहानी बुलंदी के एतेबार से उनमें और पैग़म्बर व अमीरुल मोमेनीन अलैहिमुस्सलाम में कोई फ़र्क़ न था। इससे औरत के बारे में इस्लाम के नज़रिए का पता चलता है। एक औरत इस मक़ाम पर पहुंच सकती है वह भी इस नौजवानी की उम्र में।
इमाम ख़ामेनेई
29 नवम्बर 1993
यह रिवायत, जिसे कभी इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह ने भी नक़्ल किया था कि पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम के इंतेक़ाल के बाद, जिबरईल हज़रत ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के पास आते थे, एक सही रवायत है।
अल्लाह के करम से इस्लामी इंक़ेलाब के बाद हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा का नाम इंक़ेलाब से पहले के दौर की तुलना में दस गुना नहीं दर्जनों बल्कि सैकड़ों गुना ज़्यादा दोहराया जाता है। यानी समाज फ़ातेमी समाज बन चुका है।
इमाम ख़ामेनेई 23 जनवरी 2022
महान धर्मगुरू, दक्ष लेखक मरहूम आयतुल्लाह मिस्बाह यज़्दी के परिवार ने 26 दिसम्बर 2022 को इस्लामी इन्क़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई से मुलाक़ात की। इस मुलाक़ात में आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने मरहूम की शख़्सियत, उनकी इल्मी सेवाओं और उनकी अख़लाक़ी ख़ूबियों के बारे में बातचीत की।
इस मुलाक़ात में दी गयी स्पीच इस तरह हैः
हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के शहादत दिवस की मुनासेबत से शनिवार की रात तेहरान में पहली मजलिस का आयोजन हुआ, जिसमें इस्लामी इन्क़ेलाब के नेता सैय्यद अली ख़ामनेई और कुछ शहीदों के परिवार शरीक हुए।
अगर औरतों को क़ुरआन से लगाव हो जाए तो समाज की बहुत सी मुश्किलें हल हो जाएंगी, इंशाअल्लाह क़ुरआन पर रिसर्च करने वाली महिलाओं की ट्रेनिंग के अज़ीम क़दम की बरकत से हमारे समाज का मुस्तक़बिल आज से कहीं ज़्यादा क़ुरआनी हो जाएगा।
इमाम ख़ामेनेई
20 अक्तूबर 2009
अमरीकियों ने साफ़ लफ़्ज़ों में कहा कि दाइश का गठन उन्होंने किया और अब ह्यूमन राइट्स का परचम उठाए मानवाधिकार और महिलाओं के अधिकारों के विषय पर बात करते हैं। यह सब शाहचेराग़ के आतंकी हमले में बेनक़ाब हो गए।
इमाम ख़ामेनेई
20 दिसम्बर 2022
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने तहरीके इंक़ेलाब के ज़माने के अपने पुराने साथी डाक्टर अब्बास शैबानी की नमाज़े जनाज़ा पढ़ाई और फ़ातेहा ख़्वानी की।
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने तहरीके इंक़ेलाब के ज़माने के अपने पुराने साथी डाक्टर अब्बास शैबानी की नमाज़े जनाज़ा पढ़ाई और फ़ातेहा ख़्वानी की। नमाज़े जनाज़ा में मरहूम के घरवाले और रिश्तेदार शरीक थे। डाक्टर अब्बास शैबानी इंक़ेलाब आंदोलन के पुराने संघर्षकर्ताओं में थे जिनका 22 दिसम्बर 2022 की शाम इंतेक़ाल हो गया। इंक़ेलाब काउंसिल के सदस्य, संविधान असेंबली के सदस्य, कृषि मंत्री और संसद के पांच दौर के निर्वाचित सदस्य के रूप में डाक्टर शैबानी ने देश और अवाम की ख़िदमत की। डाक्टर शैबानी तेहरान युनिवर्सिटी के चांसलर भी रहे।
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने 20 दिसम्बर 2022 को तेहरान में शीराज़ के शाहचेराग़ मज़ार में होने वाले आतंकी हमले के शहीदों के परिवारों से मुलाक़ात की। आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने इस वाक़ए के आयामों का जायज़ा लिया और अमरीका की मुनाफ़ेक़त के बारे में बताया।
स्पीच पेश हैः