फ़िलिस्तीन के मसले को भुला दिए जाने की साम्राज्यावादियों और ज़ायोनी सरकार के समर्थकों की कोशिशों के बावजूद,आज फ़िलिस्तीन का नाम पहले से ज़्यादा उज्जवल है।
मर्द की आय, मिसाल के तौर पर आफ़िस की एक बंधी हुयी रक़म है, चीज़ें महंगी हो जाती हैं लेकिन घर चलता रहता है। दोपहर को खाना तैयार है। कौन हुनरमंद है जो घर को चलाता है?
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने 3 दिसम्बर 2025 को मुल्क की हज़ारों महिलाओं और लड़कियों की सभा में ख़ेताब करते हुए, महिला अधिकार, औरतों के संबंध में इस्लामी और पश्चिमी नज़रिए सहित बहुत अहम बिंदुओं पर चर्चा की।
जहाँ भी उसने हस्तक्षेप किया या तो जंग की आग है या नस्ली सफ़ाया या विनाश और दरबदरी है, ये अमरीका के हस्तक्षेप के नतीजे हैं। अमरीकी, तेल और भूमिगत संसाधनों के लिए दुनिया में कहीं भी जंग की आग भड़काने को तैयार हैं। और आज जंग की यह आग, लैटिन अमरीका तक भी पहुंच गयी है।
हिज़्बुल्लाह की ताक़त, क्षमता और मज़बूती इन बातों से कहीं आगे है कि इन शहादतों से उस पर भारी वार लग जाए। अल्लाह की मदद से इस जंग में निश्चित फ़तह भी प्रतिरोध के मोर्चे और हिज़्बुल्लाह के मोर्चे की होगी।
इमाम ख़ामेनेई
25 सितम्बर 2024
अमरीकी, तेल और भूमिगत संसाधनों के लिए, दुनिया में कहीं भी जंग छेड़ने के लिए तैयार हैं। जंग छेड़ने की यह स्थिति अब लैटिन अमरीका तक पहुंच गयी है।
इमाम ख़ामेनेई
27 नवम्बर 2025
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने गुरुवार 27 नवम्बर 2025 की रात को टेलीविजन पर मुल्क, क्षेत्र और दुनिया के हालात के बारे में टीवी पर क़ौम से अहम ख़ेताब किया।
अमरीकी, तेल और भूमिगत संसाधनों के लिए दुनिया में कहीं भी जंग की आग भड़काने के लिए तैयार है और जंग की यह आग अब लैटिन अमरीका तक पहुंच गयी है।
इमाम ख़ामेनेई
27 नवम्बर 2025
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने 27 नवम्बर 2025 को ईरानी क़ौम से ख़ेताब में बल दिया कि 20 साल की योजनाबंदी के बावजूद, ज़ायोनियों और अमरीकियों को जून में ईरान पर हमले में शिकस्त हुयी।
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने 27 नवम्बर 2025 को ईरानी क़ौम से ख़ेताब में, 12 दिवसीय जंग में ईरानी क़ौम की एकता को अमरीका की नाकामी का सबब बताया।
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने 27 नवम्बर 2025 को ईरानी क़ौम से ख़ेताब में बल दिया कि ग़ज़ा पट्टी की त्रासदी ने ज़ायोनी सरकार और अमरीका को घृणित और बदनाम कर दिया।
रहबरे इंक़ेलाब आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने 27 नवम्बर 2025 को ईरानी क़ौम से टेलीवाइज़्ड ख़ेताब किया। इस ख़ेताब में उन्होंने ईरान अमरीका से रिश्तों और बसीज फ़ोर्स के बारे में अहम बिंदुओं पर प्रकाश डाला।
अमीरुल मोमेनीन अलैहिस्सलाम का पाकीज़ा वजूद, सबसे बड़ी नेकी है, उनका वजूद सभी भलाइयों का साक्षात रूप है। हज़रत ज़हरा ने उनकी रक्षा की, उनकी रक्षा करके, सत्य के मोर्चे को बचा लिया।
फ़िलिस्तीन के मसले को भुला दिए जाने की साम्राज्यावादियों और ज़ायोनी सरकार के समर्थकों की कोशिशों के बावजूद,आज फ़िलिस्तीन का नाम पहले से ज़्यादा उज्जवल है।
स्वंयसेवी बल बसीज या "बसीज दिवस" के मौक़े पर तेहरान के इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में बुधवार 26 नवम्बर 2025 की सुबह विशेष प्रोग्राम का आयोजन हुआ, जिस में पूरे मुल्क से आए हुए हज़ारों स्वयंसेवियों ने शिरकत की।
स्वंयसेवी बल "बसीज दिवस" के मौक़े पर तेहरान के इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में बुधवार 26 नवम्बर 2025 की सुबह विशेष प्रोग्राम का आयोजन हुआ, जिस में पूरे मुल्क से आए हुए हज़ारों स्वयंसेवियों ने शिरकत की।
हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (सलामुल्लाह अलैहा) के शहादत दिवस के सिलसिले की आख़िरी मजलिस, मंगलवार 25 नवम्बर 2025 की रात को तेहरान के इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में, हज़ारों की तादाद में श्रद्धालुओं की शिरकत से आयोजित हुयी। यह लगातार पांचवी रात मजलिस का आयोजन था।
हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (सलामुल्लाह अलैहा) के शहादत दिवस के सिलसिले की आख़िरी मजलिस, मंगलवार 25 नवम्बर 2025 की रात को तेहरान के इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में, हज़ारों की तादाद में श्रद्धालुओं की शिरकत से आयोजित हुयी। यह लगातार पांचवी रात मजलिस का आयोजन था।
यह महान महिला एक ओर पैग़म्बरे इस्लाम की महान बेटी हैं, ऐसी बेटी कि पैग़म्बर जिसके हाथ चूमते हैं, उनके आने पर पूरी तरह खड़े हो जाते हैं, जब भी कहीं सफ़र पर जाते हैं तो सबसे आख़िरी घर जिसका वह दीदार करते हैं, हज़रत फ़ातेमा ज़हरा का घर है और वहीं से वह सफ़र पर जाते हैं, जब सफ़र से लौटते हैं तो सबसे पहले जहाँ जाते और सलाम करते हैं वह हज़रत ज़हरा का घर है; ऐसी बेटी हैं वह।
इमाम ख़ामेनेई
3 फ़रवरी 2021
हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (सलामुल्लाह अलैहा) के शहादत दिवस पर, सोमवार 24 नवम्बर 2025 की रात को तेहरान के इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में, इस्लामी इंक़ेलाब के नेता और हज़ारों की तादाद में श्रद्धालुओं की शिरकत से मजलिस का आयोजन हुआ। यह लगातार चौथी रात मजलिस का आयोजन था।
हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (सलामुल्लाह अलैहा) के शहादत दिवस पर, सोमवार 24 नवम्बर 2025 की रात को तेहरान के इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में, इस्लामी इंक़ेलाब के नेता और हज़ारों की तादाद में श्रद्धालुओं की शिरकत से मजलिस का आयोजन हुआ। यह लगातार चौथी रात मजलिस का आयोजन था।
तेहरान के इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (सलामुल्लाह अलैहा) के शहादत दिवस के उपलक्ष्य में दूसरी मजलिस में "इस्राईल मुर्दाबाद" के गगन भेदी नारे।
हज़रत ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के बारे में इंसान जितना सोचता है, इस महान हस्ती के हालात के बारे में ग़ौर करता है, उतना ही हैरत में पड़ जाता है। इंसान न सिर्फ़ इस आयाम से हैरत करता है कि किस तरह एक इंसान नौजवानी में अध्यात्मिक और भौतिक लेहाज़ से महानता के ऐसे दर्जे पर पहुंच सकता है! यह अपने आप में एक हैरत अंगेज़ हक़ीक़त है, लेकिन इस आयाम से और ज़्यादा हैरत होती है कि इस्लाम तरबियत की इतनी हैरतअंगेज़ ताक़त से इतने ऊंचे स्थान पर है कि एक जवान महिला, इतने कठिन हालात में, इस ऊंचे स्थान को हासिल कर सकती है! इस हस्ती, इस महान इंसान की अज़मत भी हैरतअंगेज़ है, उस मत की अज़मत भी हैरतअंगेज़ व आश्चर्यजनक है जिसने ऐसी महान व गरिमापूर्ण हस्ती को पैदा किया।
इमाम ख़ामेनेई
16 दिसम्बर 1992
साहस का पाठ, त्याग का पाठ, दुनिया में परहेज़गारी का पाठ, ज्ञानार्जन का पाठ और ज्ञान को श्रोताओं एवं अन्य लोगों के दिमाग़ तक पहुँचाना, एक महान शिक्षक का रोल निभाना- यह सारी इंसानियत के लिए हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के पाठ हैं।
इमाम ख़ामेनेई
18 फ़रवरी 2018
हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (सलामुल्लाह अलैहा) के शहादत दिवस की पूर्व संध्या पर, रविवार 23 नवम्बर 2025 की रात को तेहरान के इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में, तीनों पालिकाओं के प्रमुखों और हज़ारों की तादाद में श्रद्धालुओं की शिरकत से मजलिस का आयोजन हुआ।
हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (सलामुल्लाह अलैहा) के शहादत दिवस की पूर्व संध्या पर, रविवार 23 नवम्बर 2025 की रात को तेहरान के इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में, तीनों पालिकाओं के प्रमुखों और हज़ारों की तादाद में श्रद्धालुओं की शिरकत से तीसरी मजलिस का आयोजन हुआ।
हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (सलामुल्लाह अलैहा) के शहादत दिवस के उपलक्ष्य में, शुक्रवार 21 नवम्बर 2025 की रात को तेहरान के इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लहिल उज़मा ख़ामेनेई सहित हज़ारों की तादात में श्रद्धालुओं की शिरकत से पहली मजलिस का आयोजन हुआ।
हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा एक महिला हैं, इस्लामी महिलाओं में सबसे ऊंची चोटी पर मौजूद महिला यानी वह महिला जो एक रहनुमा है। मगर यही महिला जो महानताओं के लेहाज़ से पैग़म्बर होने की क़ाबिलियत रखती थीं, माँ के फ़रीज़े को अंजाम देती हैं, बीवी का रोल अदा करती हैं, घर के काम अंजाम देती हैं। आप देखिए! इन चीज़ों को समझने की ज़रूरत है।
इमाम ख़ामेनेई
19 मार्च 2017
इस महान महिला की तारीख़, पैग़म्बरे इस्लाम की पैग़म्बरी की तारीख़ से पूरी तरह जुड़ी हुयी है,यानी पैग़म्बरे इस्लाम की पैग़म्बरी के आग़ाज़ के कुछ ही मुद्दत बाद,इस महान हस्ती का उदय हुआ और पैग़म्बरे इस्लाम के निधन के कुछ मुद्दत बाद उनकी रेहलत हो गयी।
इमाम हसन अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं:शबे जुमा (गुरूवार की रात) को मेरी माँ पूरी रात जागती रहीं इबादत करती रहीं,मैंने जब भी उनकी आवाज़ सुनी तो देखा कि वह दूसरों के लिए दुआ कर रही हैं सुबह मैंने कहाः माँ आपने दूसरों के लिए दुआ की,अपने लिए दुआ नहीं की?उन्होंने फ़रमायाः मेरे लाल! पहले पड़ोसी, फिर घर वाले।
"ग्रेटर इस्राईल" अब कट्टरपंथी ज़ायोनियों के चुनावी अभियानों में केवल एक धार्मिक मान्यता या वैचारिक आकांक्षा मात्र नहीं रह गया है, बल्कि व्यवहार में यह एक भू-राजनीतिक परियोजना बन गया है। इस विचार की लालची, नाजायज़ क़ब्ज़ा करने वाली और नस्लवादी प्रवृत्ति, जिसने अरब दुनिया और इस्लामी समुदायों की सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय संरचना को निशाना बनाया है, ऐसी है कि अगर इसके पहलुओं को खोलकर समझाया जाए, तो ज़ायोनीवाद की प्रवृत्ति और क्षेत्र और इस्लामी जगत के भविष्य के लिए पश्चिमी सभ्यता की साज़िश को उजागर करने में यह एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसीलिए, ज़ायोनी शासन के नेता क्षेत्रीय नई व्यवस्था, न्यू मिडिल ईस्ट, सामान्यीकरण जैसे कानूनी, सुरक्षा के पहलूओं पर आधारित और लोकप्रिय शब्दों के साथ इस अर्थ को बदलने की कोशिश करते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्ज़ ने शुक्रवार को वियना में आयोजित अपनी बैठक में योरोपीय ट्रॉयका और अमरीका की ओर से ईरान के परमाणु प्रतिष्ठान के बारे में पेश किए गए प्रस्ताव को वोटिंग के लिए पेश किया।
हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (सलामुल्लाह अलैहा) के शहादत दिवस के उपलक्ष्य में, शनिवार 22 नवम्बर 2025 की रात को तेहरान के इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लहिल उज़मा ख़ामेनेई सहित हज़ारों की तादात में श्रद्धालुओं की शिरकत से दूसरी मजलिस का आयोजन हुआ।