फ़िलिस्तीन संकट और उसका हल

फ़िलिस्तीन समस्या का बुनियादी और ठोस हल वही है जो हमने कुछ साल पहले बताया था, फ़िलिस्तीन के सभी मूल निवासियों के बीच रिफ़्रेंडम कराया जाए और उन्हें स्वीकार्य व्यवस्था सत्ता में आए और वही पूरे फ़िलिस्तीन पर शासन करे, पूरे फ़िलिस्तीन में एक सरकार जनता के वोटों से सत्ता में आए जो फ़िलिस्तीन के मामलों के बारे में फ़ैसला करे।

2021 May
फ़िलिस्तीनियों के संघर्ष का तर्क जो इस्लामी गणराज्य की तरफ़ से संयुक्त राष्ट्र संघ के दस्तावेज़ों में दर्ज हो चुका है, एक विकसित व रोचक तर्क है, फ़िलिस्तीनी संघर्षकर्ता, फ़िलिस्तीन के अस्ली निवासियों के एक रिफ़्रेंडम की बात पेश कर सकते हैं। यह रिफ़्रेंडम, देश की राजनैतिक व्यवस्था को निर्धारित करेगा और इसमें फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों समेत फ़िलिस्तीन में रहने वाले हर धर्म व जाति के लोग भाग लेंगे। यह राजनैतिक व्यवस्था विदेशों में रह रहे शरणार्थियों को स्वदेश लौटाएगी और बाहर से आकर फ़िलिस्तीन में बस जाने वाले ग़ैरों के भविष्य का निर्धारण करेगी। यह मांग, उस प्रचलित प्रजातंत्र के आधार पर है जो दुनिया में स्वीकार्य है और कोई भी इसके विकसित होने का इन्कार नहीं कर सकता। फ़िलिस्तीन संघर्षकर्ता, अवैध क़ब्ज़ा करने वाली सरकार के ख़िलाफ़ अपना क़ानूनी व नैतिक संघर्ष तब तक जारी रखें जब तक वह इस मांग को मानने पर मजबूर न हो जाए।
07/05/2021
2020 May
फ़िलिस्तीन, फ़िलिस्तीनियों का है और उन्हीं के इरादे से संचालित होना चाहिए। फ़िलिस्तीन की सभी जातियों और सभी धर्मों के मानने वालों के रिफ़्रेंडम का प्रस्ताव, जिसे हमने लगभग 20 साल पहले पेश किया है, वह एकमात्र नतीजा है जो फ़िलिस्तीन की आज और कल की चुनौतियों से सामने आना चाहिए। यह प्रस्ताव दिखाता है कि यहूदी विरोध का दावा, जिसका पश्चिम वाले लगातार ढिंढोरा पीटते रहते हैं, पूरी तरह निराधार है। इस प्रस्ताव के मुताबिक़ यहूदी, ईसाई और मुसलमान फ़िलिस्तीनी एक दूसरे के साथ एक रिफ़्रेंडम में हिस्सा लेंगे और फ़िलिस्तीनी देश की राजनैतिक व्यवस्था का निर्धारण करेंगे। जिस चीज़ को निश्चित रूप से जाना चाहिए वह ज़ायोनी व्यवस्था है और ज़ायोनिज़्म ख़ुद, यहूदी धर्म में एक ग़लत उपज है और पूरी तरह उस धर्म से अलग है।
22/05/2020
February
फ़िलिस्तीन समस्या का इलाज क्या है? इलाज, साहसिक प्रतिरोध और डट कर मुक़ाबला है। फ़िलिस्तीनी राष्ट्र, फ़िलिस्तीनी संघर्षकर्ताओं और फ़िलिस्तीनी संगठनों को अपने बलिदानी जेहाद के ज़रिए ज़ायोनी दुश्मन और अमरीका को धूल चटा देनी चाहिए। उसका रास्ता सिर्फ़ यह है और पूरे इस्लामी जगत को भी इनकी मदद करनी चाहिए, सभी मुस्लिम राष्ट्रों को फ़िलिस्तीनियों का समर्थन करना चाहिए, उनका साथ देना चाहिए, यह इलाज है। अलबत्ता मेरा मानना है कि फ़िलिस्तीन के सशस्त्र संगठन डट जाएंगे, प्रतिरोध जारी रखेंगे, रास्ता, प्रतिरोध है।... अलबत्ता फ़िलिस्तीन समस्या का बुनियादी और ठोस हल वही है जो हमने कुछ साल पहले बताया था और उसे अहम अंतर्राष्ट्रीय केंद्रों में दर्ज भी कराया गया है, फ़िलिस्तीन के सभी मूल निवासियों के बीच, न उन लोगों के बीच जो किसी देश से आ कर फ़िलिस्तीन के इलाक़े में बस गए हैं, बल्कि जो लोग फ़िलिस्तीनी हैं, चाहे किसी भी धर्म के हों, मुसलमान हों, ईसाई हों या यहूदी हों, क्योंकि कुछ फ़िलिस्तीनी मुसलमान हैं, कुछ ईसाई हैं, कुछ यहूदी हैं, इन सबके बीच रिफ़्रेंडम कराया जाए और उन्हें स्वीकार्य व्यवस्था सत्ता में आए और वही पूरे फ़िलिस्तीन पर शासन करे, केवल उस इलाक़े पर नहीं जो उन्हीं के शब्दों में अवैध अधिकृत इलाक़ा है, फ़िलिस्तीन के एक भाग को अवैध अधिकृत इलाक़ा कहते हैं, पूरे फ़िलिस्तीन में एक सरकार जनता के सार्वजनिक वोटों से सत्ता में आए जो फ़िलिस्तीन के मामलों के बारे में फ़ैसला करे। नेतनयाहू जैसे लोगों के बारे में भी वही लोग फ़ैसला करें, अधिकार उनके हाथ में है। यह एकमात्र रास्ता है जो फ़िलिस्तीन में शांति और फ़िलिस्तीन समस्या के हल के बारे में पाया जाता है।
05/02/2020
2019 June
हम, कुछ पुराने अरब नेताओं की तरह, जिन्होंने कहा कि यहूदियों को समुद्र में डाल देंगे, यहूदियों को समुद्र में डालने वाले नहीं हैं। हम कहते हैं कि फ़िलिस्तीनी राष्ट्र का भरपूर संघर्ष, राजनैतिक संघर्ष, सशस्त्र संघर्ष, नैतिक व सांस्कृतिक संघर्ष तब तक जारी रहना चाहिए जब तक फ़िलिस्तीन पर अवैध क़ब्ज़ा करने वाले, फ़िलिस्तीनी राष्ट्र के वोटों के सामने झुक नहीं जाते। सभी फ़िलिस्तीनियों का, चाहे वे मुसलमान हों, ईसाई हों, यहूदी हों या फिर वे लोग जिन्हें फ़िलिस्तीन से बाहर निकाल दिया गया और वे फ़िलिस्तीनी हैं, रिफ़्रेंडम कराया जाए और वे लोग तैय करें कि फ़िलिस्तीन में कौन सी व्यवस्था का राज हो और सभी उसकी बात मानें, संघर्ष इस समय तक जारी रहना चाहिए और जारी रहेगा। अल्लाह की कृपा से, उसकी मदद और ताक़त से फ़िलिस्तीनी राष्ट्र इस शांतिपूर्ण, मानवीय और पूरी दुनिया के बौद्धिक विधानों में स्वीकार्य संघर्ष में विजेता होगा और फ़िलिस्तीनी देश, फ़िलिस्तीनियों को वापस मिलेगा और ईश्वर की इच्छा से आप नौजवान वह दिन देखेंगे।
05/06/2019