rss https://hindi.khamenei.ir/feed/service/13519 hi बज़्म-ए-रहबर में शब-ए-शेर https://hindi.khamenei.ir/news/8691 जब मैं हुसैनिया इमाम ख़ुमैनी पहुंचा तो शाम के साढ़े चार बज रहे थे। मग़रिब की नमाज़ में अभी लगभग दो घंटे बाक़ी थे। हालांकि, सफ़ों को व्यवस्थित रखने के लिए कपड़े की पट्टियां बिछा दी गई थीं, जो सजदे और खड़े होने की जगह को दर्शाती थीं। पहली सफ़ आधी से थोड़ी कम भरी हुई थी और दूसरी सफ़ उससे भी छोटी थी। एक साहब ब्राउन रंग का कुर्दी लेबास पहने हुए नज़र आए, जो अहले सुन्नत फिरक़े से थे और अस्र की नमाज़ अदा कर रहे थे। मग़रिब की नमाज़ में वो मेरे सामने वाली सफ़ में थे। Sat, 29 Mar 2025 13:39:00 +0330 .. /news/8691 ज़ायोनी शासन ग़ज़ा में क्यों हार गया? https://hindi.khamenei.ir/news/8569 औरतों और बच्चों को क़त्ल करना फ़तह नहीं है ग़ज़ा जंग से अगरचे इस इलाक़े के लोगों को बहुत ज़्यादा तबाही और नुक़सान का सामना हुआ लेकिन इसका नतीजा ज़ायोनी शासन की कल्पना के बिल्कुल ख़िलाफ़ रेज़िस्टेंस के हित में आया। जंग में कामयाबी सिर्फ़ मरने वालों की तादाद या तबाही के स्तर से आंकी नहीं जाती, बल्कि हर जंग का अंतिम लक्ष्य स्ट्रैटेजिक उपलब्धियों तक पहुंच होता है। ज़ायोनी शासन इस जंग में अपने घोषित लक्ष्य को न सिर्फ़ यह कि हासिल नहीं कर पाया, बल्कि बहुत से मैदानों में उसे ऐसी हार हुयी है जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं है। Sat, 08 Feb 2025 11:00:00 +0330 .. /news/8569 ज़ायोनी शासन ग़ज़ा में क्यों हार गया? https://hindi.khamenei.ir/news/8525 औरतों और बच्चों को क़त्ल करना फ़तह नहीं है ग़ज़ा जंग से अगरचे इस इलाक़े के लोगों को बहुत ज़्यादा तबाही और नुक़सान का सामना हुआ लेकिन इसका नतीजा ज़ायोनी शासन की कल्पना के बिल्कुल ख़िलाफ़ रेज़िस्टेंस के हित में आया। जंग में कामयाबी सिर्फ़ मरने वालों की तादाद या तबाही के स्तर से आंकी नहीं जाती, बल्कि हर जंग का अंतिम लक्ष्य स्ट्रैटेजिक उपलब्धियों तक पहुंच होता है। ज़ायोनी शासन इस जंग में अपने घोषित लक्ष्य को न सिर्फ़ यह कि हासिल नहीं कर पाया, बल्कि बहुत से मैदानों में उसे ऐसी हार हुयी है जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं है। Sat, 08 Feb 2025 08:39:00 +0330 .. /news/8525 ग़ज़ा की महिलाओं का ऐतिहासिक रेज़िस्टेंस https://hindi.khamenei.ir/news/8494 बरसों से पश्चिमी जगत ने मुसलमान औरतों की ऐसी छवि पेश की है जो पश्चिमी सरकारों के वैचारिक और भूराजनैतिक लक्ष्यों से प्रभावित रही है। इस छवि के तहत मुसलमान औरतों को एक असहाय, मज़लूम और बिना पहचान वाली औरत के तौर पर पेश किया जाता है जो मर्दों के प्रभुत्व वाले सिस्टम की जेल में और धार्मिक आस्था की बेड़ियों में क़ैद है। Tue, 28 Jan 2025 20:04:00 +0330 .. /news/8494 विजय की ख़ुशख़बरी https://hindi.khamenei.ir/news/8465 इस्लामी इंक़ेलाब के नेता से क़ुम के अवाम की मुलाक़ात जो बुधवार 8 जनवरी 2025 को हुयी, क़ुम के लोगों के निर्णायक आंदोलन की बरसी के उपलक्ष्य में थी। इस मौक़े पर आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने इस आंदोलन की क़द्रदानी करने के साथ ही, नीतियों और समीक्षा का एक ख़ाका पेश किया जो रोडमैप के समान था और वाक़यात की गहरी समीक्षा का तरीक़ा बताने वाला था।  Sun, 19 Jan 2025 14:14:00 +0330 .. /news/8465 अफ़्रीक़ा की जंगः अफ़्रीक़ा महाद्वीप के भविष्य के लिए अफ़्रीक़ी महिलाएं पश्चिमी पूंजीवाद के ख़िलाफ़ सक्रिय https://hindi.khamenei.ir/news/8449 पश्चिमी पूंजीवाद किस तरह अफ़्रीक़ा महाद्वीप में पारिवारिक सिस्टम को तबाह करने और वहाँ अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश में लगा है। इस बारे में एक लेख  पेश है। Mon, 13 Jan 2025 14:18:00 +0330 .. /news/8449 औरत, पूंजीवाद और धोखा https://hindi.khamenei.ir/news/8416 सन 1920 में, ठीक उस वक़्त जब चुनाव में अमरीकी महिलाओं ने पहली बार भाग लिया, संयुक्त राज्य अमरीका में शराब बनाने, उसके परिवहन और बेचने पर रोक का क़ानून, संघीय क़ानून बन गया। अमरीकी औरतों की ओर से शराब पीने पर पाबंदी को सपोर्ट, इस तरह के पेय की लत के नुक़सान और अमरीका के पारंपरिक कल्चर के संबंध में उनकी सामाजिक सूझबूझ को दर्शाती थी। उसी साल ओलियो थामस, कमेडी फ़िल्म फ़्लीपर में शराब और सिगरेट पी रहा था और साथ ही उसे अपने पारंपरिक परिवार के ज़ुल्म का शिकार दिखाया जा रहा था। एक ही चीज़ के बारे में समाज की आम इच्छा और मीडिया की ओर से पेश की गयी छवि के बीच यह खुला विरोधाभास, उस बड़े संघर्ष का एक छोटा सा मंज़र था जो अमरीकी कल्चर में जारी था यानी सामाजिक परंपरा और पूंजीवाद की कभी न मिटने वाली भूख के बीच संघर्ष। Tue, 31 Dec 2024 11:18:00 +0330 .. /news/8416 दूसरे मुल्कों के इलाक़ों पर क़ब्ज़े के संबंध में अमरीका का दोहरा मापदंड https://hindi.khamenei.ir/news/8410 इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने 11 दिसम्बर 2024 को अपनी स्पीच में कहा कि ज़ायोनी शासन ने सीरिया के इलाक़ों पर क़ब्ज़ा तो किया ही, साथ ही उसके टैंक दमिश्क़ के क़रीब तक पहुंच गए। गोलान हाइट्स के अलावा, जो दमिश्क़ का था और बरसों से उसके हाथ में था, दूसरे इलाक़ों पर भी क़ब्ज़ा करना शुरू कर दिया। अमरीका, योरोप और वे सरकारें, जो दुनिया के दूसरे मुल्कों में इन चीज़ों पर बहुत संवेदनशील हैं और एक मीटर और दस मीटर पर भी संवेदनशीलता दिखाती हैं, इस मसले पर न सिर्फ़ यह कि ख़ामोश हैं, एतेराज़ नहीं कर रही हैं बल्कि मदद भी कर रही हैं। यह उन्हीं का काम है। अब सवाल यह है कि अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के मुताबिक़, दूसरे मुल्कों की सरज़मीन पर इस तरह के क़ब्ज़े का क्या हुक्म है और इस सिलसिले में अमरीका और योरोप की उदासीनता की वजह क्या है? Sat, 28 Dec 2024 18:24:00 +0330 .. /news/8410 सिविल वॉर या विदेशी हस्तक्षेप? सीरिया के संकट में अमरीका का हाथ https://hindi.khamenei.ir/news/8384 सीरिया में सिविल वार की आग, जिसके शोले सन 2011 में भड़के थे, बड़ी तेज़ी से विश्व की बड़ी ताक़तों के हस्तक्षेप के मैदान में बदल गयी। इस संकट में बुनियादी और क्रूर रोल अदा करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी ताक़त अमरीका था। Sun, 15 Dec 2024 12:39:00 +0330 .. /news/8384 मानवाधिकार का ध्वजवाहक या सबसे बड़ा दुश्मन? अमरीका की करतूतों पर एक नज़र https://hindi.khamenei.ir/news/8370 मानवाधिकार ऐसा विषय है कि अमरीका पूरी दुनिया में उसकी रक्षा का सबसे बड़ा दावेदार रहा है और पिछले दशकों में उसे उसने अपनी चौधराहट को फैलाने और दूसरी सरकारों की आलोचना के लिए हथकंडे के तौर पर इस्तेमाल करता रहा है। ऐसे राष्ट्रों की तादाद बहुत ज़्यादा है जिन पर पिछले दशकों में अमरीकी सरकार ने मानवाधिकार के उल्लंघनकर्ता का इल्ज़ाम लगाया और ऐसी सरज़मीनें भी बहुत हैं जहाँ अमरीका ने प्रजातंत्र और मानवाधिकार क़ायम करने के नाम पर चढ़ाई की। लेकिन हक़ीक़त में बहुत सी रिपोर्टें और ठोस डेटा इस बात के गवाह हैं कि आज अमरीका पूरी दुनिया में मानवाधिकार का सबसे बड़ा उल्लंघनकर्ता है।  Tue, 10 Dec 2024 12:37:00 +0330 .. /news/8370 अमरीका में दास प्रथा का अंत हुआ ही नहीं https://hindi.khamenei.ir/news/8353 2 दिसम्बर को दास प्रथा के अंत का विश्व दिवस मनाया जाता है। इस दिन कोशिश की जाती है कि मानव तस्करी, लोगों के यौन शोषण, बाल शोषण, बच्चों की जबरन शादी और जंगों में उनके इस्तेमाल जैसी इस दौर की ग़ुलामी के रूपों पर ध्यान केन्द्रित किया जाए ताकि इन चीज़ों के ख़िलाफ़ विश्व स्तर पर आंदोलन शुरू हो सके।  इस बात में कोई शक नहीं है कि उक्त अपराध, इंसानों के ख़िलाफ़ होने वाले सबसे घिनौने अपराधों में शामिल हैं लेकिन क्या किसी काम के लिए इंसान को मजबूर किया जाना सिर्फ़ ग़ुलामी के रूप में ही होता है? क्या वैचारिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जंजीरें, इंसान को ग़ुलामी में नहीं जकड़ सकतीं? Tue, 03 Dec 2024 18:20:00 +0330 .. /news/8353 युद्ध विराम और सरहद के दोनों तरफ़ दो अलग हक़ीक़तें https://hindi.khamenei.ir/news/8343 जब दक्षिणी लेबनान के पहाड़ी टीलों पर सुबह का सूरज प्रकट हुआ तो गाड़ियों का एक क़ाफ़िला आगे की तरफ़ बढ़ने लगा और उनके हार्न से वतन वापसी के नग़में की गूंज सुनाई देने लगी। लेबनान के लोग, जो ज़ायोनिस्ट रेजीम की आक्रामकता की वजह से एक मुद्दत से बेघर हो गए थे, बुधवार की सबुह स्थानीय वक़्त के मुताबिक़ 4 बजे युद्ध विराम शुरू होने के फ़ौरन बाद अपने अपने गांवों की ओर तेज़ी से वापस लौटने लगे। खिड़कियां खुलने लगीं और हाथों में हिज़्बुल्लाह के पीले रंग के परचम लहराने लगे जो चैन और रिहाई का चिन्ह है। Sun, 01 Dec 2024 09:18:00 +0330 .. /news/8343 इस्लामी इंक़ेलाब के नेता की ख़ुशख़बरी ने स्वयंसेवियों का संकल्प और मज़बूत कर दिया https://hindi.khamenei.ir/news/8335 मुल्क भर से आए हुए हज़ारों स्वयंसेवियों ने सोमवार 25 नवम्बर 2024 को तेहरान में इस्लामी इंक़ेलाब के नेता से मुलाक़ात की। जोश व श्रद्धा से भरे इस प्रोग्राम के माहौल, लोगों के जज़्बात और दूसरी अहम बातों के बारे में एक रिपोर्ट पेश है।  लेखकः मोहसिन बाक़ेरीपूर Wed, 27 Nov 2024 14:54:00 +0330 .. /news/8335 2006 की जंग की तुलना में हिज़्बुल्लाह के मौजूदा आप्रेशन में बुनियादी बदलाव https://hindi.khamenei.ir/news/8304 2006 की जंग और हिज़्बुल्लाह के मौजूदा आप्रेशन में आए बुनियादी बदलाव की इस लेख में समीक्षा की गयी है। Sun, 17 Nov 2024 08:22:00 +0330 .. /news/8304 'मुर्जेफ़ून'; समाज के मानसिक स्वास्थ्य को नुक़सान पहुंचाने वाले https://hindi.khamenei.ir/news/8299 इस्लामी इंक़ेलाब के नेता के बयानों की बुनियाद पर 'मानसिक व मनोवैज्ञानिक सुरक्षा' के विषय पर सूरए अहज़ाब की आयत-60 पर एक नज़र Wed, 13 Nov 2024 15:28:00 +0330 .. /news/8299 लेबनान में रेज़िस्टेंस की जड़ें कितनी मज़बूत हैं और क्यों? हिज़्बुल्लाह नसरुल्लाह की अमर यादगार https://hindi.khamenei.ir/news/8296 हिज़्बुल्लाह के स्वरूप और उसके ढांचे और उसकी आस्था पर रौशनी डालने वाली तहरीर। इस लेख में हिज़्बुल्लाह की स्थापना, उसकी स्थिति और अजेय समझी जाने वाली ज़ायोनी सेना के मुक़ाबले में उसकी रणनीति की समीक्षा की गयी है। Mon, 11 Nov 2024 11:28:00 +0330 .. /news/8296 नसरुल्लाह से सिनवार तक, रेज़िस्टेंस के शहीदों का 'सच्चा वादा' https://hindi.khamenei.ir/news/8255 17 अक्तूबर, मक़बूज़ा फ़िलिस्तीनी ज़मीनों को ज़ायोनी शासन के चंगुल से छुड़ाने के लिए फ़िलिस्तीनियों के 7 दशक से ज़्यादा का संघर्ष अमर हो गया; यह वह दिन है जिसमें "फ़्रंटलाइन पर लड़ने वाले" कमांडरों में से एक कमांडर दुश्मन से आमने सामने की लड़ाई लड़ रहा था और मुजाहिदों, आज़ादी और सत्य प्रेमियों के लिए आइडियल बन गया। Tue, 29 Oct 2024 10:40:00 +0330 .. /news/8255 हमास ज़िंदा है और ज़िंदा रहेगा https://hindi.khamenei.ir/news/8238 ज़ायोनिस्ट रेजीम ने 7 अक्तूबर 2023 को सैन्य, सुरक्षा और इंटेलिजेंस की नज़र से ऐसे वार खाने के बाद कि जिसकी भरपाई नहीं हो सकती, ग़ज़ा में फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ भयानक अपराध और उनके जातीय सफ़ाए को अपना एजेंडा बना लिया। Thu, 24 Oct 2024 17:31:00 +0330 .. /news/8238 इंसानियत की ढाल; यहया सिनवार ग़ज़ा के बच्चों की ढाल बन गए https://hindi.khamenei.ir/news/8235 यहया सिनवार ने किस तरह पश्चिमी मीडिया के दुष्प्रचार को अपनी शहादत से बेनक़ाब किया, इस बारे में एक लेख पेश है।  Wed, 23 Oct 2024 17:24:00 +0330 .. /news/8235 अलअक़्सा फ़्लड आप्रेशन के नाम पर ज़ायोनी सरकार को क़ानूनी दर्जा दिलाने की योजना बुरी तरह नाकाम https://hindi.khamenei.ir/news/8231 इस लेख में फ़िलिस्तीनी मामलों के रिसर्च स्कालर और लेखक अली रज़ा सुलतान शाही ने इतिहास के बैकग्राउंड में क्षेत्र में ज़ायोनी सरकार को मान्यता दिलाने और उसके वजूद को मज़बूत करने की पश्चिम की कोशिशों और उसकी साज़िश की इस्लामी इंक़ेलाब के हाथों नाकामी और उसके क्षेत्र में फैलते असर का कि जिसका चरम अलअक़्सा फ़्लड आप्रेशन के रूप में सामने आया, जायज़ा लिया है। Wed, 23 Oct 2024 11:14:00 +0330 .. /news/8231 ग़ज़ा में जनसंहार से लेकर लेबनान में अपराधों तक, तेल अवीव के आतंकी गैंग को अमरीका की स्थायी हरी झंडी https://hindi.khamenei.ir/news/8223 अमरीका के इशारे पर ज़ायोनी शासन एक ओर ग़ज़ा में जातीय सफ़ाया तो दूसरी ओर लेबनान में अपराध कर रहा है। इस बारे में एक लेख पेश है।    Mon, 21 Oct 2024 11:27:00 +0330 .. /news/8223 आतंकवाद के ख़िलाफ़ 2 दशक से ज़्यादा समय की जंग; क्षेत्र और अपनी अवाम को अमरीका ने क्या तोहफ़ा दिया?! https://hindi.khamenei.ir/news/8121 11 सितंबर 2001 की घटना के बाद अमरीका ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ 2 दशक से ज़्यादा समय की जंग में कैसे कैसे घिनौने अपराध किए और बुश, ओबामा, ट्रम्प और बाइडेन जैसे लोगों ने अमरीकी अवाम के हितों पर अपने व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता देकर लाखों बेक़ुसूर लोगों को आतंकवाद के ख़िलाफ़ जंग के बेबुनियाद बहाने से क़ुरबान कर दिया। इस बारे में एक लेख पेश है। Tue, 10 Sep 2024 09:36:00 +0330 .. /news/8121 प्रतिरोध का समाज और क़ाबिज़ों की भीड़ https://hindi.khamenei.ir/news/8117 किस तरह ज़ायोनियों के बढ़ते ज़ुल्म के बावजूद रेज़िस्टेंस मोर्चे का दायरा फैल रहा है। इस बारे में एक लेख पेश है। Sun, 08 Sep 2024 17:17:00 +0330 .. /news/8117 बेशरमाना जस्टिफ़िकेशन; ग़ज़ा से हिरोशीमा तक https://hindi.khamenei.ir/news/8048 अमरीका का इतना छोटा सा इतिहास, इंसानों के ख़िलाफ़ ज़ुल्म और अपराधों से भरा हुआ है। इस सरज़मीन के अस्ली मालिकों व मूल निवासियों के नरसंहार से लेकर इस्राईल के सरकारी आतंकवाद के ज़रिए ज़मीनों को हड़पने और फ़िलिस्तीन की जनता के क़त्लेआम को सपोर्ट करने तक और एक जुमले में हिरोशिमा से ग़ज़ा तक, इन सबका सुलह, मानवता, मानवाधिकार, लोकतंत्र जैसे सुंदर लफ़्ज़ों की आड़ में, साम्राज्य के पिट्ठू प्रचारिक तंत्रों के ज़रिए बहुत ही घिनौनी शक्ल में जस्टिफ़िकेशन पेश किया जाता है। इस बारे में लेख पेश है। Mon, 05 Aug 2024 13:05:00 +0330 .. /news/8048 इस्लामी गणराज्य में जनादेश के अनुमोदन का अर्थ और अहमियत https://hindi.khamenei.ir/news/8013 इस्लामी गणराज्य में वरिष्ठ नेता की ओर से राष्ट्रपति के आदेशपत्र का अनुमोदन होता। जनादेश का अनुमोदन सिर्फ़ एक औपचारिकता है या इसकी अहमियत है? इस बारे में लेख पेश है। Sun, 28 Jul 2024 11:46:00 +0330 .. /news/8013