गुमराही के सभी कारण मौजूद होने के बावजूद, अल्लाह की कृपा से हमारी क़ौम के लोग मोमिन हैं, अल्लाह को चाहते हैं, धर्म से परिचित हैं, अध्यात्म से लगाव रखते हैं। नौजवान आज की इस दुनिया में जिस पर भौतिकवाद हावी है, परेशान हैं। अध्यात्म से दूरी ने उनको हैरान व परेशान कर रखा है, वो समझ नहीं पा रहे हैं कि क्या करें? उनके विचारक भी हैरान हैं। उनके कुछ बुद्धिजीवियों की भी समझ में आने लगा है कि उनके कामों में सुधार का रास्ता अध्यात्म की ओर वापसी है लेकिन किस तरह उस खोए हुए अध्यात्म को, जिसे 200 बरस के दौरान मुख़्तलिफ़ तरीक़ों से कुचला गया है, दोबारा ज़िन्दा करें? यह काम आसान नहीं है, लेकिन हमारी क़ौम ऐसी नहीं है। हमारी क़ौम ने हमेशा अध्यात्म के इस स्रोत से ख़ुद को जोड़े रखा है और इसी अध्यात्म के ज़रिए एक महाक्रांति को कामयाब बनाया है। इसी अध्यात्म के ज़रिए इस भौतिकवादी दुनिया में एक इस्लामी सिस्टम का परचम जो अध्यात्म पर टिका है, लहरा रखा है, इसके स्तंभों को मज़बूत कर दिया है और इसको दुश्मनों की सभी यलग़ारों और तूफ़ानों से सुरक्षित रखने में कामयाबी हासिल की है।

इमाम ख़ामेनेई

19/06/2009