इंसान अगर सही दिशा में क़दम उठाएं तो सही दिशा में आगे बढ़ेंगे और अगर ग़लत राह पर लग जाएं तो ग़लत राहों पर ही बढ़ते चले जाएंगे। क़ुरआन में इन दोनों ही बातों की ओर इशारा मौजूद है। सूरए राद (की आयत 11) में इरशाद होता हैः "बेशक अल्लाह किसी क़ौम की उस हालत को नहीं बदलता जो उसकी है जब तक क़ौम ख़ुद अपनी हालत को न बदले।" आयत में सार्थक पहलू को बयान किया गया है, यानी जब आप ख़ुद अपने भीतर सही बदलाव लाएंगे तो अल्लाह भी आपकी ज़िन्दगी में सार्थक घटनाएं व हक़ीक़तें वजूद में लाएगा। दूसरे पहलू की ओर सूरए अनफ़ाल (की 53वीं आयत) में इशारा हुआ हैः "ये इस बिना पर है कि अल्लाह कभी उस नेमत को तबदील नहीं करता जो उसने किसी क़ौम को अता की है जब तक कि वो ख़ुद अपनी हालत तबदील न कर दें।" ये नकारात्मक पहलू है, ये पीछे हटने का पहलू है कि अगर अल्लाह ने किसी क़ौम को कोई नेमत दी और उसने सही दिशा में क़दम नहीं उठाया और सही काम अंजाम नहीं दिए तो अल्लाह उस नेमत को उनसे छीन लेता है। इमाम ख़ामेनेई 03/06/2020