मानवाधिकार ऐसा विषय है कि अमरीका पूरी दुनिया में उसकी रक्षा का सबसे बड़ा दावेदार रहा है और पिछले दशकों में उसे उसने अपनी चौधराहट को फैलाने और दूसरी सरकारों की आलोचना के लिए हथकंडे के तौर पर इस्तेमाल करता रहा है। ऐसे राष्ट्रों की तादाद बहुत ज़्यादा है जिन पर पिछले दशकों में अमरीकी सरकार ने मानवाधिकार के उल्लंघनकर्ता का इल्ज़ाम लगाया और ऐसी सरज़मीनें भी बहुत हैं जहाँ अमरीका ने प्रजातंत्र और मानवाधिकार क़ायम करने के नाम पर चढ़ाई की। लेकिन हक़ीक़त में बहुत सी रिपोर्टें और ठोस डेटा इस बात के गवाह हैं कि आज अमरीका पूरी दुनिया में मानवाधिकार का सबसे बड़ा उल्लंघनकर्ता है।
अमरीका, मानवाधिकार का झंडा उठाता है और उसका सपोर्ट करने का दावा करता है लेकिन हर कुछ दिन बाद अमरीकी शहरों की सड़कों पर कोई बेगुनाह, कोई निहत्था, अमरीकी पुलिस के हाथों ख़ून में लथपथ हो जाता है।
इमाम ख़ामेनेई
9 सितंबर, 2015
अमरीका मानवाधिकार का झंडा उठाए हुए है, लेकिन मानवाधिकार का सबसे बड़ा उल्लंघन अमरीका के संरक्षण में हो रहा है। अमरीकी न सिर्फ़ यह कि इस तरह की हरकतों को रोकने में नाकाम रहे बल्कि उसका सपोर्ट करते हैं।
इमाम ख़ामेनेई
31 अक्तूबर, 2012
युक्रेन के मसले में सबने यूरोप की नस्ल परस्ती देखी। वे खुले आम इस बात पर दुख ज़ाहिर करते हैं कि इस बार जंग मध्यपूर्व में नहीं बल्कि यूरोप में छिड़ गयी है। दूसरे लफ़्ज़ों में यूं कहें कि अगर जंग और क़त्लेआम मध्यपूर्व में हो तो ठीक है।