इस्लामी इंक़ेलाब के नेता का यह बयान सोवमार 24 फ़रवरी 2025 को इस कान्फ़्रेंस के आयोजन स्थल क़ुम में जारी किया गया।

उन्होंने बौद्धिक ज्ञान और रवायतों पर आधारित इल्म और फ़िक़्ह, दर्शनशास्त्र और अध्यात्म के मैदानों में भी आयतुल्लाह जवादी आमुली के कामों की सराहना करते हुए कहा कि इनमें से किसी भी काम की तुलना क़ुरआन की तफ़सीर के उनके काम से नहीं की जा सकती।

आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने "तस्नीम" नामी तफ़सीर को शिया और धार्मिक शिक्षा केन्द्र के लिए क़ाबिले फ़ख़्र काम बताया और इस तफ़सीर की कुछ ख़ुसूसियतों के उल्लेख में कहा कि सम्मानीय मुफ़स्सिर की गहरी चिंतन शक्ति, क़ुरआन की आयतों में छिपे सूक्ष्म और कोमल बिंदुओं को समझने में बहुत मदद करती है।

इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने "तस्नीम" नामक तफ़सीर के अरबी अनुवाद को मुकम्मल किए जाने को इस्लामी जगत के लिए ज़रूरी बताया और आयतुल्लाह जवादी आमुली और इस तफ़सीर के शोधकर्ताओं की टीम की सराहना की।

क़ाबिले ज़िक्र है कि "तस्नीम" नामक तफ़सीर 80 जिल्दों पर आधारित है। यह आयतुल्लाह जवादी आमुली के 40 साल के अध्यापन और शोध पर आधारित है और इसी तरह दसियों शोधकर्ताओं के सहयोग से लिखी गयी है। यह, क़ुरआन की क़ुरआन के ज़रिए व्याख्या पर आधारित तफ़सीर की श्रेणी में आती है। लेखक, मद्देनज़र आयत या आयतों का ज़िक्र और उसकी समीक्षा चार चरणों में: "संक्षिप्त तफ़सीर", "आयत की तफ़सीर", "इशारे" और "रवायत पर आधारित चर्चा" करते हैं।