सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने इस मौक़े पर तक़रीर करते हुए कहा कि इस्लामी दुनिया में जिस तरह से अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम से मुहब्बत की जाती है उसकी कोई और मिसाल नहीं है।  

सुप्रीम लीडर ने कहा कि आज इस्लामी समाज को अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम की तालीमात के हर पहलू की सख़्त ज़रूरत है और वर्ल्ड एसेंबली को असरदार और लॉजिकल तरीक़ों से बड़ी बारीकी के साथ सही प्लानिंग करके इस भारी ज़िम्मेदारी को पूरा करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अहलेबैत के रास्ते पर चलने वालों को, युनिटी और कोआपेरशन के मैदान में सब से आगे होना चाहिए। जैसा कि हमने पहले दिन से ही कहा है कि वर्ल्ड अहले बैत एसेंबली को बनाने का मक़सद, गैर शिया लोगों से दुश्मनी और मुक़ाबला करना नहीं है, इसी लिए शुरु से ही सही राह पर चलने वाले ग़ैर शिया भाइयों को हम साथ लेकर आगे बढ़े हैं।

सुप्रीम लीडर ने कहा कि साम्राज्यवादी ताक़तों की इस वक़्त की साज़िश, इस्लामी दुनिया में पाए जाने वाले ग़ैर अहम फ़ासलों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करना है।

उन्होंने कहा कि शिया-सुन्नी, अरब-ग़ैर अरब, शिया-शिया और सुन्नी-सुन्नी की लड़ाई के लिए उकसाना और साज़िशें रचना बड़े शैतान यानी अमरीका की पॉलीसी है जो हमें आज कल कुछ मुल्कों में नज़र आ रही है, हमें इस साज़िश के सिलसिले में अपनी आंखें खुली रखना चाहिए।

इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने साम्राज्यवादी ताक़तों के ख़िलाफ़, इस्लामी जुम्हूरी हुकूमत के लहराते परचम का ज़िक्र किया और कहा कि अहलेबैत के रास्ते पर चलने वालों और पूरी दुनिया के शियों के लिए यह फ़ख़्र की बात है कि हमारी इस्लामी हुकूमत, साम्राज्यवादी ताक़त के सात सिरों वाले अजगर (ड्रैगन) के सामने ढाल बन कर खड़ी है और इमपेरियलिस्ट ताक़तें भी यह मानती हैं कि इस हुकूमत ने उनके बहुत से मंसूबों को नाकाम बना दिया है।

आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि इस्लामी जुम्हूरी हुकूमत के अंदर डट जाने की यह ताक़त, अहलेबैत की पैरवी की देन है क्योंकि इन चमकते सितारों ने, अपने बयानों और अपने अमल से हमें यह सिखाया है कि किस तरह क़ुरआने मजीद पर ग़ौर और उस पर अमल करके हम इस्लाम की राह पर आगे बढ़ सकते हैं।

उन्होंने कहा कि इस्लामी जुम्हूरी हुकूमत का परचम, दरअस्ल, इन्साफ़ और रूहानियत का परचम है तो ज़ाहिर सी बात है कि ज़ुल्म व ज़्यादती और दुनियादारी व दौलत परस्ती में यक़ीन रखने वाली साम्राज्यवादी ताक़तें, इस परचम की दुश्मनी और मुख़ालेफ़त के लिए खड़ी हो जाएंगी।

सुप्रीम लीडर ने साम्राज्यवादी मोर्चे का सरग़ना अमरीका को बताया और कहा कि इमाम ख़ुमैनी ने क़ुरआने मजीद से सीख लेते हुए सब को यह सिखाया कि वह इस्लामी समाजों के बीच ग़ैर वास्तविक खाई को पाट दें और सिर्फ़ एक ही हद और बार्डर में यक़ीन रखें जो इस्लामी दुनिया और क़ुफ्र व साम्राज्यवाद के बीच मौजूद असली फ़र्क़ और सरहद है।

उन्होंने कहा कि इसी गहरे यक़ीन की वजह से फ़िलिस्तीन की मदद, पहले दिन से ही इस्लामी इन्क़ेलाब के एजेन्डे में शामिल रही और इमाम ख़ुमैनी पूरी ताक़त से फ़िलिस्तीन के साथ खड़े हो गये और आज भी इस्लामी जुम्हूरी हुकूमत इमाम ख़ुमैनी के हाथों बनायी गयी इसी सियासी लाइन पर आगे बढ़ रही है और मुस्तक़बिल में भी इसी लाइन पर वफ़ादारी के साथ आगे बढ़ती रहेगी।

सुप्रीम लीडर ने कहा कि आज पूरी इस्लामी दुनिया की अलग अलग क़ौमें ईरानी क़ौम से बेमिसाल लगाव रखती हैं तो इसकी वजह यह है कि ईरानी अवाम, इमाम ख़ुमैनी की उस स्ट्रेटजी की पांबदी करते हैं जिसमें इस्लामी दुनिया में मसलक, क़ौम और नस्ल की बुनियाद पर बंटवारे को नकार दिया जाता और इसी लिए हमने हमेशा इस्लामी मुल्कों को “ शिया-सुन्नी” “अरब-ग़ैर अरब” और इसी तरह की दूसरी लकीरों को नज़रअंदाज़ करने और बुनियादों और उसूलों को अहमियत देने की दावत दी है।

आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने कहा कि ईरान से साम्राज्यवादी ताक़तों की दुश्मनी की वजह यह है कि ईरान की इस्लामी हुकूमत, धौंस और धांधली के सामने डट जाने के लिए दूसरी क़ौमों का हौसला बढ़ाती है।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग मुल्कों में अमरीका की मुजरेमाना साज़िशों को नाकाम बनाने की वजह से कि जिसकी एक मिसाल दाइश है, वह ईरान और शियों से डर पैदा करने के लिए बड़े पैमाने पर प्रोपैगंडे कर रहा है और ईरान पर दूसरे मुल्कों में दख़लअंदाज़ी करने का इल्ज़ाम लगाता है।   

आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस्लामी जुम्हूरिया ईरान किसी दूसरे मुल्क में किसी तरह की दख़लअंदाज़ी नहीं करता। उन्होंने  कहा कि साम्राज्यवादी ताक़तों की तरफ़ से इस तरह के इल्ज़ाम इस लिए लगाए जाते हैं कि वे इस्लामी जुम्हूरी हुकूमत की गैर मामूली तरक़्क़ी को रोकने में नाकाम रही हैं। उन्होंने कहा कि यक़ीनी तौर पर सब को साम्राज्यवादी ताक़तों की साज़िशों से होशियार रहना चाहिए और किसी भी तरह से उनकी मदद नहीं करना चाहिए।

सुप्रीम लीडर ने कहा कि इस्लामी दुनिया में हार्ड और सॉफ़्ट पावर की जो गुंजाइश और सलाहियतें हैं उनके साथ वह दुश्मनों का अच्छी तरह से मुक़ाबला करने की ताक़त से लैस है।

सुप्रीम लीडर ने इस्लाम की सच्चाई और तालीमात, ख़ुदा भर भरोसा, तारीख़ पर उम्मीद भरी नज़र और महदवीयत के अक़ीदे को इस्लामी दुनिया की साफ़्ट पावर की सलाहियतें बताया और कहा कि आज वेस्टर्न वर्ल्ड और लिबरल डेमोक्रेटिक नज़रिया बंद गली में पहुंच चुका है।

उन्होंने कहा कि जहां तक हार्ड पावर की सलाहियतों का ताल्लुक़ है तो यह सही है कि साम्राज्यवादी ताक़तों ने क़ब्ज़ा करके और इस्लामी दुनिया को हासिल नेमतों को तरह तरह की साज़िशों के ज़रिए इस्तेमाल करके ख़ुद को ताक़तवर बना लिया है लेकिन इसके बावजूद इस्लामी दुनिया में तरक़्क़ी के लिए क़ुदरती सलाहियतें बहुत ज़्यादा हैं जिसकी एक मिसाल तेल और गैस है जिसकी अहमियत आज सब पर पहले से ज़्यादा खुल गयी है।

आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने आख़िर में कहा कि इस्लामी दुनिया के आने वाले दिन उजालों से भरे हैं और शिया मुसलमान, इस्लामी दुनिया के फ़्यूचर में बड़ा रोल अदा कर सकते हैं।

इस मुलाक़ात के शुरु में वर्ल्ड अहले बैत एसेंबली के सेक्रेटरी जनरल हुज्जतुल इस्लाम वलमुसलेमीन रमज़ानी ने “अहलेबैत, अक़्ल पसंदी, इन्साफ़ और इज़्ज़त की बुनियाद” के नारे के साथ और 117 देशों के मेहमानों की शिरकत से आयोजित होने वाली वर्ल्ड अहलुलबैत एसेंबली की सातवीं कान्फ्रेंस की रिपोर्ट पेश की।