आपने अगर संघर्ष किया और दृढ़ता दिखाई तो अल्लाह की ताक़त आपके साथ होगी। वो लश्कर जिसका अल्लाह मददगार न हो वो कुछ नहीं कर सकता। एक ऐसा लश्कर जिसकी पीठ मज़बूत है, जिसके पास रिज़र्व फ़ोर्स है, अथाह ताक़त का भंडार है, वो सारे काम कर सकता है। एक ऐसा लश्कर जिसकी पीठ मज़बूत है, उसके पीठ पर अल्लाह की ताक़त हो तो क्या ऐसा लश्कर हार सकता है? इसी उसूल के तहत साम्राज्यवाद के क़ब्ज़े में मौजूद सभी सरज़मीनें आज़ाद हो सकती हैं, इसी उसूल के तहत फ़िलिस्तीन भी आज़ाद हो सकता है, इसी उसूल पर अमल से कोई भी राष्ट्र कमज़ोर न रहेगा...अल्लाह की ताक़त उनकी पीठ पर होती है जो मैदान में उतर पड़ते हैं, क़दम बढ़ाते हैं और कोशिश करते हैं, ख़ुद को सभी हालात के लिए तैयार कर लेते हैं। ये लोग अल्लाह की ताक़त पर भरोसा करते हैं। "यह इसलिए है कि अल्लाह अहले ईमान का सरपरस्त है और जो काफ़िर हैं उनका कोई सरपरस्त और कारसाज़ नहीं है" (सूरए मोहम्मद, आयत-11)
इमाम ख़ामेनेई
23/5/2016