ताक़त में वृद्धि के संबंध में सिर्फ़ इस बात को न देखें कि हम हथियारों का भंडार बढ़ा रहे हैं, हथियारों की तादाद ज़्यादा कर रहे हैं और नई नई ईजाद कर रहे हैं, बल्कि इस में मुल्क की डिटरेंस ताक़त भी शामिल है, मुल्क की सुरक्षा को बनाए रखना भी है। दुश्मन को एहसास हो कि आप कमज़ोर हैं तो उसमें हमले की हिम्मत पैदा होती है और जब उसको एहसास हो कि आप ताक़तवर हैं तो हमले का इरादा रखता हो तो अपने फ़ैसले पर फिर से ग़ौर करने पर मजबूर हो जाता है। इसीलिए अल्लाह ने फ़रमाया हैः "ताकि तुम उस (जंगी तैयारी) से अल्लाह के दुश्मन और अपने दुश्मन को ख़ौफ़ज़दा कर सको" (सूरए अन्फ़ाल, आयत-60) यह तादाद और ताक़त जिस पर क़ुरआन में बल दिया गया है "अल्लाह के दुश्मन को ख़ौफ़ज़दा कर सको" इससे मुल्क में अमन व सुरक्षा क़ायम होती है, इसलिए आप देख सकते हैं कि काफ़ी मुद्दत तक बार बार कहा करते थे कि फ़ौजी कार्यवाही का विकल्प मेज़ पर मौजूद है। (अब) एक मुद्दत हो गयी यह बात ज़बान पर नहीं लाते, इसमें कोई असर नहीं रहा, ये बात मूल्यहीन हो गयी।
इमाम ख़ामेनेई
21/08/2023