तमाम मुसलमान, पैग़म्बरे इस्लाम सल्लललाहो अलैहि वआलेही वसल्लम और औलिया अल्लाह (संत) के हवाले से ठोस हदीसों की बुनियाद पर इमाम महदी अलैहिस्सलाम के वजूद की हक़ीक़त को मानते हैं लेकिन यह हक़ीक़त इस्लामी दुनिया में कहीं भी हमारी क़ौम और शियों की तरह इतना ज़्यादा नुमायां नहीं है और इसका ऐसा जगमगाता रूप और ऐसा धड़कता व उम्मीद से भरा जोश कहीं नहीं है। यही वजह है कि हम अपनी ठोस रिवायतों की बरकत से, इमाम महदी अलैहिस्साम को उनकी ख़ुसूसियतों के साथ पहचानते हैं। इमाम ख़ामेनेई 9/12/1992
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