इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम ने कर्बला की दुखद घटना के बाद लगभग 34 साल उस समय के इस्लामी माहौल में जीवन बिताया और उनका यह जीवन हर तरह से पाठ है। काश जो लोग, इस जीवन की बेजोड़ विशेषताओं को जानते हैं, वे इसे लोगों के लिए, मुसलमानों बल्कि ग़ैर मुस्लिमों के लिए बयान करते ताकि मालूम होता कि कर्बला की घटना के बाद जो, (दुष्ट यज़ीद की तरफ़ से) सच्चे इस्लाम के शरीर पर एक गहरा वार थी, चौथे इमाम ने किस तरह प्रतिरोध करके धर्म को ख़त्म होने से बचाया है।