जब वो हमारे काउंसलेट पर हमला करते हैं तो ये ऐसा ही है जैसे हमारे मुल्क पर हमला कर दिया है। ये दुनिया में आम समझ है। दुष्ट हुकूमत ने इस मामले में ग़लती की है। उसे सज़ा मिलनी चाहिए और सज़ा मिलेगी।
इमाम ख़ामेनेई
10/04/2024
इस साल रमज़ान के महीने में ग़ज़ा के ख़ूंरेज़ वाक़यात ने सारी दुनिया में मुसलमानों को रंजीदा कर दिया। अल्लाह की लानत हो क़ाबिज़ ज़ायोनी हुकूमत पर। ज़ायोनी हुकूमत ने एक और ग़लती अपनी ग़लतियों में बढ़ा ली और वो सीरिया में ईरान की काउंसलेट पर हमला था। घटिया हुकूमत को सज़ा मिलेगी।
पश्चिमी हुकूमतों ने अपने फ़रीज़े पर अमल नहीं किया। किसी ने ज़बानी कोई बात कह दी। लोगों के सपोर्ट में लेकिन अमली तौर पर न सिर्फ़ यह कि उन्होंने रोका नहीं बल्कि उनमें ज़्यादातर ने मदद भी की।
ख़ुद दुष्ट हुकूमत ने जो सिर से पैर तक घटिया हरकतों, दुष्टता और ग़लती से भरी हुयी है
एक और ग़लती अपनी ग़लतियों में बढ़ा ली और वो सीरिया में ईरान की काउंसलेट पर हमला था।
जब ज़ायोनी हुकूमत सीरिया में ईरान के काउंसलेट पर हमला करती है तो समझिए उसने हमारी सरज़मीन पर हमला किया है। दुष्ट हुकूमत ने ग़लती कर दी, उसे सज़ा मिलनी चाहिए और सज़ा मिलेगी।
यह चीज़ कि #फ़िलिस्तीन का मुद्दा #लंदन में #पैरिस में और #वाशिंग्टन में पहले नंबर का मुद्दा बन जाए मामूली बात नहीं है। इसकी कोई नज़ीर नहीं है। साफ़ ज़ाहिर है कि इस्लामी दुनिया में एक नई तब्दीली आ रही है।
अफ़सोसनाक है कि फ़िलिस्तीन के मसले में इस्लामी हुकूमतें ज़ायोनी सरकार की मदद कर रही हैं। ज़ायोनी जब किसी देश में क़दम रखते हैं तो मच्छर की तरह उस देश का ख़ून चूसते हैं, अपने स्वार्थ के लिए। इमाम ख़ामेनेई 10 अप्रैल 2024
तेहरान में ईदे फ़ित्र की मुख़्य नमाज़ इमाम ख़ुमैनी मुसल्ला में बुधवार की सुबह अवाम की बड़ी तादाद की शिरकत से इस्लामी इंक़ेलाब के नेता सैयद अली ख़ामेनेई की इमामत में अदा की गयी।
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने बुधवार 10 अप्रैल 2024 की सुबह मुल्क के आला अधिकारियों, तेहरान में नियुक्त इस्लामी देशों के राजदूतों और अवाम के विभिन्न वर्गों की एक तादाद से मुलाक़ात की।
रहबरे इंक़ेलाब आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने 10 अप्रैल 2024 को ईदुल फ़ित्र के दिन इस्लामी शासन व्यवस्था के अधिकारियों, इस्लामी देशों के राजदूतों और अवामी तबक़ों से मुलाक़ात में अपनी तक़रीर में ईदुल फ़ित्र, रमज़ानुल मुबारक और ग़ज़ा जंग के बारे में बात की। (1)
तेहरान के इमाम ख़ुमैनी मुसल्ला काम्पलेक्स में 10 अप्रैल 2024 को ईदुल फ़ित्र की नमाज़ अदा की गई। नमाज़ के ख़ुतबों में रहबरे इंक़ेलाब आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने रमज़ानुल मुबारक की ख़ास रूहानी फ़ज़ा के बारे में बात की और ईरान के दूतावास पर इस्राईल के हमले के बारे में अहम एलान किया। (1)
रहमान अल्लाह की आम रहमत है जिसका दायरा संसार की सभी चीज़ों पर फैला हुआ है लेकिन कम मुद्दत के लिए यानी क़यामत से पहले तक, रहीम यानी अल्लाह की वो रहमत जो मोमिनों से मख़सूस है और किसी ख़ास वक़्त तक सीमित नहीं है बल्कि हमेशा है।
सवालः अगर किसी शहर में शव्वाल (ईद) का चाँद दिखाई न दे लेकिन रेडियो और टीवी पर चाँद के नज़र आने की ख़बर दी जाए तो क्या ये काफ़ी है या और छानबीन करना वाजिब है?
जवाबः अगर उस ख़बर से यक़ीन हासिल हो जाए या चाँद होने का इत्मेनान हो जाए या वलीए फ़क़ीह की ओर से चाँद होने का हुक्म जारी किया गया हो तो ये काफ़ी है और छानबीन की ज़रूरत नहीं है।
यूनिवर्सिटी के तीन मुख़्य फ़रीज़े हैं। विद्वान की तरबियत करे, दूसरे ये कि इल्म का प्रोडक्शन करे और तीसरे ये कि विद्वान की तरबियत और इल्म के प्रोडक्शन को दिशा दे। दुनिया की यूनिवर्सिटियां विद्वान की तरबियत करती हैं, इल्म का प्रोडक्शन भी करती हैं लेकिन इस तीसरे फ़रीज़ें में लड़खड़ा जाती हैं। नतीजा क्या होता है? नतीजा ये होता है कि उनके इल्म की तरबियत, इल्म का प्रोडक्शन और विद्वान की तरबियत का प्रोडक्ट दुनिया ज़ायोनी और साम्राज्यवादी ताक़तों के हाथों का खिलौना बन जाता है। इस बारे में एक लेख पेश है।
पश्चिम के महिला अधिकार के झूठे दावे को
ज़ायोनियों के अपराध भुलाए नहीं जा सकेंगे यहाँ तक कि ज़ायोनी शासन के तबाह हो जाने के बाद भी। लेखक किताबों में लिखेंगे कि इन लोगों ने कुछ हफ़्तों में हज़ारों बच्चों और औरतों को मार डाला।
इमाम ख़ामेनेई
09/01/2024
अल्लाह से माफ़ी के लिए सिर्फ़ दुआ ज़रूरी नहीं है, अमल भी ज़रूरी है। वो अमल क्या है? गुनाहों से तौबा, इस्तेग़फ़ार, गुनाह को छोड़ना और भविष्य में दोबारा न करने का संकल्प, अमल ये चीज़ें हैं।
जो शिकस्त 7 अक्तूबर को हुई उसकी भरपाई नहीं हो सकती। वो हुकूमत जो सटीक इंटैलीजेंस पर निर्भर है और दावा करती है कि परिंदा पर भी मारे तो उसकी नज़र से पोशीदा नहीं रहता, सीमित संसाधनों वाले एक रेज़िस्टेंस संगठन से शिकस्त खा गई।
इमाम ख़ामेनेई
3 अप्रैल 2024
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने 8 अप्रैल 2024 बराबर 27 रमज़ान 1445 को मुल्क की अलग अलग युनिवर्सिटियों के छात्रों और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाक़ात में देश, समाज और शैक्षिक संस्थानों से जुड़े अहम मुद्दों पर बात की। (1)
सभी लोगों को सचेत करता हूं कि चौकन्ना रहिए कहीं आपका दिल टेढ़ा न हो जाए, अगर हम व्यवहारिक तौर पर टेढ़े हो गए तो अल्लाह भी हमारे दिल को टेढ़ा कर देगा, हमारा बुरा कर्म, हमारे दिल को बुरा बना देगा।
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने रविवार की शाम को मुल्क के क़रीब 3000 स्टूडेंट्स और स्टूडेंट यूनियनों के प्रतिनिधियों से मुलाक़ात में जो क़रीब तीन घंटे तक जारी रही, आज से बेहतर कल को मुल्क और इस्लामी व्यवस्था का मुख़्य लक्ष्य क़रार किया और इस बुनियादी लक्ष्य को हासिल करने और मुल्क की भौतिक व आध्यात्मिक तरक़्क़ी के लिए स्टूडेंट्स और स्टूडेंट्स यूनियनों से नए नए सुझाव और इनोवेशन पर ताकीद करते हुए कहा कि विद्वान की तरबियत, इल्म का प्रोडक्शन और इन दोनों चीज़ों को दिशा देना यूनिवर्सिटी के तीन मुख्य फ़रीज़े हैं।
पश्चिमी सभ्यता ने अपनी धूर्तता, पाखंड और झूठ को ज़ाहिर कर दिया। जब तीन या चार महीने में ज़ायोनी शासन के हाथों 30000 लोग मारे जाते हैं तो वो अपनी आँखें बंद कर लेते हैं मानो कुछ हुआ ही न हो।
इमाम ख़ामेनेई
24/02/2024
ख़ुदा फ़रामोशी की सज़ा, ख़ुद फ़रामोशी है। ख़ुद फ़रामोशी यानी आत्म सुधार को भूल जाना, यानी अपने ऐबों को भूल जाना, ख़ुद फ़रामोशी यानी अपनी सलाहियतों को भुला देना और अपने भीतर पाए जाने वाले विकास, तरक़्क़ी, निखार और उत्थान को भूल जाना है।
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई ने नए हिजरी शम्सी साल और ईदुल फ़ित्र के मौक़े पर 2000 से ज़्यादा क़ौदियों की सज़ा माफ़ करने या उनकी सज़ाओं में कमी करने की न्यायपालिका प्रमुख की दर्ख़ास्त को मंज़ूरी दे दी है।
इंसान जब ख़ुद अपना हिसाब किताब करता है और अपने ऐबों को देखता है तो शर्मिंदा होता और उन्हें ठीक करने की कोशिश करता है। कम से कम अल्लाह का डर उसके दिल में पैदा होता है। ये वो चीज़ें हैं जो इंसान के लिए उत्थान का सबब हैं।
इस साल का क़ुद्स दिवस एक अंतर्राष्ट्रीय एलाने मुख़ालेफ़त होगा क़ाबिज़ ज़ायोनी हुकूमत के ख़िलाफ़ यानी इस साल अगर पिछले वर्षों में क़ुद्स दिवस सिर्फ़ इस्लामी देशों में मनाया जाता था तो इस साल पूरी संभावना है कि ग़ैर इस्लामी देशों में भी क़ुद्स दिवस इंशाअल्लाह अज़ीम पैमाने पर मनाया जाएगा।
हमें उम्मीद है कि हमारे आज के नौजवान वह दिन देखेंगे जब क़ुद्स शरीफ़ मुसलमानों के हाथों में हो और इस्लामी दुनिया इस्राईल के ख़ात्मे का जश्न मनाए।
इमाम ख़ामेनेई
3 अप्रैल 2024