सारे मुसलमान भाई हैं और उनमें आपस में इत्तेहाद होना चाहिए, फूट नहीं होना चाहिए...वे लोग जिन्हें ओहदे दिए गए हैं और क़ौम के बाक़ी तबक़ों की यह ज़िम्मेदारी है कि इस्लामी जुम्हूरिया की हिफ़ाज़त करें; और यह ज़िम्मेदारी, ऐसी ज़िम्मेदारी है जो इस्लाम की सबसे ज़्यादा अहम ज़िम्मेदारियों में से एक है और यह सिर्फ़ आपसी समझ बूझ और इस चीज़ से ही मुमकिन है कि पूरी क़ौम आपस में भाईचारे से रहे। मोमिन आपस में भाई हैं। अगर यह ईमानी भाईचारा हमारे पूरे मुल्क में क़ायम रहा और कोई भी सिर्फ़ अपने बारे में न सोचे, मक़सद पर ध्यान दे और ख़ुद को मक़सद के लिए वक़्फ़ कर दे, तो कोई भी इस मुल्क को टेढ़ी नज़र से नहीं देख सकता ... बड़ी ताक़तें घात में बैठी हुयी हैं कि उनके एजेन्ट इस मुल्क में उनके लिए रास्ता बनाएं, यह रास्ता ख़ुद इस मुल्क के रहने वाले उनके लिए साफ़ करें। वे पहले आपके सामने नहीं आएंगी, वे इन्हीं रास्तों से, बिके हुए क़लम से, गुमराह विचारों से जिसे वे इस्तेमाल करती हैं, आपकी तरफ़ आएंगी और आपके बीच अफ़वाहों व झूठी बातों से हर एक को दूसरे के ख़िलाफ़ बदगुमानी में डाल देंगी।

इमाम ख़ुमैनी

11-5-1983